
परिवार की प्रगति मैत्री से होती है जहां मैत्री नहीं वहा प्रगति नहीं, ,विश्रुत सागर महाराज,
जैन मंदिरों में अष्टानिका पर्व धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है,10 जुलाई को निकलेगी रथ यात्रा,
नवकार नगर के सामाजिक बंधुओ ने नवकार नगर के लिए मुनि संघ को श्रीफल भेंट किया,
खंडवा ।। राग और कर्म मनुष्य के सबसे बडे शत्रु हैं ,राग के चलते जीव अपने और अपनों के सभी दोष छुपा लेता है ,यही राग कर्मबंध कर लेता है। देव शास्त्र और गुरु से अनुराग कर राग को समाप्त कर ही सम्यक दर्शन की और जाया जा सकता है। इसकै लिये निर्विचिकित्सा अंग अर्थात ग्लानिभाव समाप्त करने का भाव रखना होगा। यह उदगार चल रही नित्य प्रवचन माला में प्रवचन देते विश्रुत सागर जी महाराज ने व्यक्त किये। मुनिश्री ने कहा कि सज्जन का कोई मित्र अथवा शत्रु नही होता ! वह निर्मोही और गुणोपासक होता है ! समाज अथवा परिवार की प्रगति मैत्री से होती है,जहां मैत्री नही वहां प्रगति नही हो सकती। मनुष्य जीव सम्यक दर्शन,उत्तम ज्ञान, एवं चारित्र्य से पवित्र होता है , जहां देह अपनी नहीं वहां न अपना कोय, अर्थात चर्म अथवा देह से अनुराग करने की जगह गुणों का अनुराग करने वाला जीव सम्यक दृष्टि होता है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि हर्ष का विषय है कि इस वर्ष चातुर्मास के लिए मुनि श्री विश्रुत सागर एवं निवेद सागर जी महाराज का हमें सानिध्य प्राप्त हुआ है है धार्मिक अनुष्ठानों एवं प्रवचनों के माध्यम से प्रतिदिन धर्म प्रभावना हो रही है। प्रतिदिन मुनि संघ के प्रवचन प्रातः काल आयोजित हो रहे हैं। सराफा पोरवाड़ दिगम्बर जैन धर्मशाला में चल रही प्रवचन माला में प्रवचन के पश्चात बडी संख्या में उपस्थित होकर नवकार नगर में मुनिसंघ के चातुर्मास हेतु निवेदन किया। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि पूज्य मुनिसंघ दो पिच्छी चातुर्मासिक धर्म प्रभावना हेतु खंडवा में विराजित है। प्रतिदिन प्रात: 8.30 बजे से सराफा पोरवाड़ दिगम्बर जैन धर्मशाला मे प्रवचन लाभ लिया जा सकता है। इन दोनों अष्टानिका पर्व के दौरान खंडवा के समस्त दिगंबर जैन मंदिरों में मंडल विधान की पूजा के साथ श्री जी का अभिषेक एवं शांति धारा की जा रही है। पर्व के समापन के अवसर पर 10 जुलाई को शहर में श्री जी की रथ यात्रा मुनी संघ के सानिध्य में निकाली जाएगी।
रविवार को पूज्य मुनिसंघ की आहार व्यवस्था का पुण्यार्जन श्रीमती साधना राजेश पाटनी एवं श्रीमती शानू योगेंद्र जैन परिवार ने प्राप्त किया ।












